एकादशी व्रत 2022 तिथियां, व्रत के नियम, मंत्र, कथा, पूजा विधि

एकादशी एक मात्र ऐसा व्रत है जो सब व्रतो से बड़ा है यह पूरे साल में 24 पड़ता है महीने में 2 पड़ता है ।एक शुक्ल पक्ष में दूसरा कृष्ण पक्ष में।इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा होती हैं जिन्हें नारायण भी कहा जाता है ।जो सारे पापो से मुक्त करने वाले है ।

एकादशी व्रत क्या है

एकादशी व्रत एक ऐसा व्रत है जो सारे पापो से छुटकारा दिलाता है और हमेसुख और समृद्धि कि प्राप्ति होती है।इसको करने वाले को कभी कोई परेशानी नहीं होती है भगवान नारायण उसकी सहायता करते हैं।इस व्रत को स्त्री और पुरुष दोनों रख सकते है ।इस व्रत में अन्न का दान किया जाता है जो सबसे बड़ा दान होता है

एकादशी की जन्मकथा

एक बार धरती पर पाप बहुत जादा बढ़ने लगा पूरी धरती पापो के बोझ के नीचे परेशान होने लगी उस समय भगवान नारायण के भक्त भगवान से अपनी रक्षा करने की विनती करने लगे उस समय भगवान विष्णु ने अपने भक्तो की रक्षा करने के लिए माता एकादशी को प्रकट किया और अपने भक्तो से उनकी पूजा अर्चना करने को बताया ।मा एकादशी की पूजा करने से व्रत रखने से पुण्य बढ़ने लगा और पाप कम होने लगा जिसको देखकर पाप भगवान विष्णु के पास जाकर कहा कि पुण्य बढ़ रहा है और अब हम कहा जाए तो भगवान विष्णु ने कहा तुम सब लोग एक दिन के लिए अन्न में समा जाओ इस लिए एकादशी के व्रत मेअन्न का सेवन नहीं किया जाता है अधिकतर लोग इस व्रत को निर्जल ही रखते है

एकादशी के दिन चावलक्यों नहीं खाना चाहिए

पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि जब व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसको जीवात्मा 12 दिन तक अपने घर में ही रहती है और भटकती रखती है 12 वें दिनजब यम लोक मे जाती है तो 3 दिन तक उसको नरक भोगना पड़ता है उसके बाद 18 दिन तक वो स्वर्ग में रहती है उसके बाद जीवात्मा को धरती पर धान के खेत में फेक दिया जाता है धान से जोचावल निकलता है उसको जो प्राणी खाता है उस जीव आत्मा का सारा पाप उस प्राणी के अंदर चला जाता है  और उस प्राणी को वैसा ही जीवन प्राप्त होता हैं।लेकिन एकादशी के दूसरे दिन चावल जरूर खाना चाहिए क्योंकि अगर आप चावल खाते है तो उस जीव आत्मा का पाप काम हो जाएगा आपके एकादशी के व्रत के पूर्ण के वज़ह से इस लिए एकादशी के दिन चावल का नहीं खाया जाता हैं।

एकादशी का व्रत किस तरह करना चाहिए

एकादशी व्रत के एक दिन पहले से ही शरीर को शुद्ध रखना चाहिए साम के समय शुद्ध भोजन ही करना चाहिए इस व्रत में शरीर की शुद्धता बहुत जरूरी रहता है इसलिए ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए इस व्रत को किया जाता है और जिस दिन व्रत रखना होता है उस दिन सुबह मे भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करना चाहिए और एक बार ही फलाहार खाना चाहिए अगर आप निर्जल व्रत नहीं है तो उसके अगले दिन जिस समय पारण का समय होता है उसी समय के अंदर पारणकरना चाहिए अगर समय पर आप पारणनहींकर पाते हैं तो आप उस दिन भोजन करना ही नहीं चाहिए।

एकादशी व्रत के दिन के नियम एकादशी व्रत के विशेष नियम है

  • इस व्रत के एक दिन पहले से ही शुद्ध भोजन करना चाहिए मांस ,मछली, लहसुन ,प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए
  • इस व्रत मे भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि  विधान के साथ करना चाहिए
  • इस व्रत के दिन किसी भी स्थिति में किसी को बुरा भला नहीं कहना चाहिए
  • इस व्रत मेअन्न का सेवन नहीं करना चाहिए
  • इस व्रत के ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी पौधे की कोई डाली या पत्ती ने टूटे
  • इस व्रत मेदातुन करना चाहिए कोई भी मंजन नहीं करना चाहिए
  • इस व्रत को पूरे श्रद्धा के साथ करना चाहिए व्रत के दिन किसी के प्रति कोई हीन भावना नहीं रखना चाहिए बल्कि इस व्रत को पूरे मन और संकल्प के साथ करना चाहिए
  • इस व्रत मे चावल का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए
  • इस व्रत के दिन प्रातः काल उठकर सब क्रियाओं से निपट कर  स्नान करके शरीर को पूर्ण रूप से शुद्ध कर लेना चाहिए।
  • इस व्रत के जितने नियम बनाए गए है उन सबका पालन करना चाहिए ।ऐसा करने से ही व्रत का पूर्ण लाभ मिलता है
  • इस व्रत मे ब्रह्मचर्य का पालन करना अति आवश्यक हैं जिस पर हमे विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • इस व्रत मेअन्न का दान करना जरूरी है अतः हम अन्न का दान करके है अगले दिन पारणकरना चाहिए।

एकादशी की पूजन विधि यह विधि निम्न प्रकार से किया जाता है

  •  सबसे पहले आसान बिछा कर उसके शांत अवस्था मे बैठ जाना चाहिए
  • उसके बाद आपने आप को शुद्ध करने के लिए मंत्रो के साथ आम के पल्लो से जल छिड़कना चाहिए ॐ केशवायनम ,ॐ नारायणयनमॐ माधवाय नम , ॐ ऋषिकेसवाय नम आदि के साथ आपने आप को जल डालकर  शुद्ध करना चाहिए।
  • उसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति को स्थापित करके कलश की स्थापना करके भगवान विष्णु का मंत्रो के साथ आवाहन करेंगे ॐ नमो भगवतेवासुदेवायनमः का जाप करेंगे।
  • उसके बाद हवन करने के लिए अग्नि देव का सबसे पहले पूजन करेपुष्प , अक्षत रोली चावल चंदन के साथ और उसके पश्चात ही अग्नि को जलाए और हवन करे ।
  • इस व्रत मे पूरे दिन भगवान का नाम लेना चाहिए और रात में जगराता करना चाहिए ।
  • इस विधि के साथ पूजा करने से सारे पापो से मुक्ति मिलती है और एकादशी माता सारे दुखी का निवारण करती है ।
  • अगले दिन निर्धारित समय पर ही पारण करना चाहिए और अन्न का दान करना चाहिए।