प्रयागराज का अर्थ, कैसे और क्यों रखा इसका नाम इलाहाबाद

प्रयाग उत्तर प्रदेश का ही एक शहर है जहां पर हर 6 वर्ष पर अर्द्ध कुंभ और 12 वर्ष पर कुंभ का विशाल मेला लगता है यह कुम्भ गंगा , यमुना ,और सरस्वती तीनों का जहा मिलन होता है जिसे त्रिवेणी कहा जाता है वहा लगता है प्रयाग शहर का उल्लेख पौराणिक कथाओं में भी मिलता है।ऐसी मान्यता है कि यह शहर सबसे पवित्र शहरों में से एक है इसका निर्माण ब्रह्मा जी के द्वारा किया गया है प्राचीन काल मे भारत को आर्य व्रत कहा जाता था क्योंकि  यहां के मूल निवासी  आर्य थे  और  ओ लोग घूम  घूम कर पूजा  पाठ हवन किया करते थे ऐसी  मान्यता है कि आर्यो ने सबसे पहले प्रयाग शहर में ही आपना पहला यज्ञ किया था ।इस लिए इसे प्रयाग राज कहा गया  ।

इलाहाबाद नाम कैसे पड़ा

प्राचीन काल से ही प्रयाग धार्मिक स्थान माना जाता है इसकी पवित्रता गंगा , यमुना और सरस्वती तीनों नदियों के कारण है वेद पुराणों में इसका जिक्र मिलता है लेकिन जब भारत में मुगल आए तोसाल 1574 मे सम्राट अकबर ने प्रयाग के अलग बगल किलो का निर्माण करने लगा धीरे धीरे इसको बढ़ाने लगा उसके बाद एक शहर को स्थापित किया जिसका नाम इल्हा बाद रखा उसके बाद इसका नाम बदल कर इलाहाबाद रख दिया गया इल्हा का मतलब भगवान या खुदा या अल्हा और बाद मतलब शहर या नगर पूरा लेकर इसका मतलब आल्हा का नगर हो गया और बाद में चलकर जैसे ही उत्तर प्रदेश में नई सरकार बनी वैसे ही अपने धार्मिक स्थान को फिर से धार्मिक बनाने के लिए इसका नाम बदल कर प्रयाग राज रख दिया ।

प्रयाग राज के प्रमुख पर्यटक स्थल प्रयाग राज के प्रमुख पर्यटक स्थल निम्न है

  • गंगा यमुना और सरस्वती का संगम  प्रयाग राज मे गंगा यमुना और सरस्वती का संगम है जहा पर तीनों नदिया एक साथ मिलती है यहां पर नदियों का पानी अलग अलग देखा जा सकता है। और यहां पर हर 6 साल पर अर्द्ध कुम्भ और 12 साल पर कुम्भ के मेले का आयोजन किया जाता हैं।
  • इलाहाबाद म्यूजियम यह प्रयाग का एक प्रसिद्ध म्यूजियम है जिसको देखने के लिए अधिकतर बच्चो का टुर जय करता है । यहां पर कई इतिहास से जुड़ी हुई चीजें देखने को मिलेंगी जिससे आपको विभिन्न प्रकार की जानकारी मिल सकती है।
  • इलाहाबाद पिलर यह पिलर प्रयाग राज में स्थित है इस पिलर का निर्माण अकबर मे करवाया है जिसे अशोक अक्लर के नाम जाना जाता है ।
  • आंनद भवन  यह भवन प्रयाग मे है इस भवन का निर्माण देश के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के पिता पंडित मोती लाल नेहरू ने बनवाया था वो लोग यही पर रहते थे और यही पंडित जवाहर लाल नेहरू का निवास स्थान था।लेकिन इस समय ये स्वतंत्रता से जुड़ी कुछ खास चीज को यह रखा जाता है जिसको देखने के लिए लोग आते है और जानकर प्राप्त करते है ।
  • चंद्रशेखर पार्क इस पार्क का निर्माण सन 1870 ईसवी में हुआ यह पार्क बहुत बड़ा है यह पार्क चंद्रशेखर आजाद के याद में बनवाया गया है यही पर 1931 ईसवी में चंद्रशेखर आजाद को फांसी दी गई थी यह पार्क प्रयाग राज का बहुत बड़ा पार्क है जिसमे सुबह 6 बजे से लेकर रात 10 बजे तक लोग घूमने आते है इस पार्क में चंद्रशेखर आजाद जी की एक प्रतिमा भी है जो हमारे भारत देश की शान है।
  • बड़ा हनुमान मंदिर यह भगवान हनुमान जी का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां पर सोए हुए हनुमान जी का मंदिर है और जिनकी पुजा की जाती है और यह मंदिर त्रिवेणी के तट पर स्थित हैं।और जो लोग भी यहां आते है त्रिवेणी मे स्नान करने के बाद इनका दर्शन करते है ।

प्रयाग राज की शैक्षिक इतिहास

प्रयाग राज में सबसे पहली पाठशाला महर्षि भारद्वाज जी के द्वारा खोली गई थी जिसमे लगभग 10000 शिष्य पढ़ा करते थे वैदिक काल में यहां बहुत से पठसलाए थी जिसे गुरुकुल कहा जाता था । यहां पर बच्चे अपने घर को छोड़ कर आके यही रह के ज्ञान लिया करेते थे।इस काल के बाद बौद्ध धर्म के लोग भी यहा पर आकर कई मठो की स्थापना जिसने छात्र शिक्षा ग्रहण करने जाते थे ।उसके बाद मुस्लिम समाज के लोग आए उस समय अकबर का शासन काल था उन्होंने प्रयाग का नाम बदल कर कर इलाहाबाद कर दिया उन्होंने भी शिक्षा के लिया व्यवस्था कि थी मुस्लिम काल मे यह 12 दायरे हुआ करते थे उसके बाद यह अंग्रेजो का शासन धीरे धीरे होने लगा उन्होंने 1856 मे यहां अंग्रेजो ने को स्कूलों को खोला पहला था प्राइमरी स्कूल और 7बजार स्कूल और 1 महिला पाठ शाला खोली थी इन स्कूलों में लगभग 4000 बच्चे पढ़ते थे।उसके बाद जंगक्षीण  गई अंग्रेज़ शासन करना चालू कर दिए ओ यहां के कच्चे सामान को सस्ते दाम पर खरीद कर हम वही समान महंगे दामों पर देते थे भारत देश पर अपना अधिकार जमाने लगे

जो उनके बातो को नहीं मानता था ओ उन सभी लोगों को मरवा देते थे यहां के लोगो पर ज़ुल्म करने लगे थे उसके बाद स्कूलों को बंद करवा दिया गया उसके 2 साल बाद फिर से स्कूलों को खोला गया और उसमे शिक्षण का कार्य फिर से होने कहा इसको कई भागों मे बा टा गया

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में प्राइमरी ,मिडिल ,हाईस्कूल , इंटरमीडिएट, स्नातक और स्नातकोत्तर इत्यादि इस समय छात्र अपनी शिक्षा के लिए प्रयाग मे जाते है वहा परीक्षाओं की तैयारियां करते है ।

प्रयाग राज की खासियत

प्रयाग राज की सबसे बड़ी खासियत त्रिवेणी है यहां कुभ लगता है कुम्भ का मतलब होता है घड़ा 

कुंभ क्या है

एक बार देवता और राक्षसों ने मिलकर समुन्दर का मंथन किया जिसमे से कई वस्तुएं निकाल समुन्दर मंथन से अमृत का घड़ा निकला जिसको देवता लेकर भाग गए राक्षस उस घड़े के लिए देवतायो से 12 दिन तक युद्ध किए और देवता जब घड़ा लेकर भागे थे तो वो आसमान से उड़ के गए थे जिससे उस अमृत के घड़े का पानी धरती पर 4 जगह गिर गया था उसी स्थान पर कुम्भ लगता हैं।इनका युद्ध 12 दिनों तक हुआ था इस लिए हर बारह साल बाद कुम्भ लगता है यह तीनों नदियों के संगम पर लगता ऐसी मान्यता है कि इसमें स्नान करने से सभी पापो से मुक्ति मिलती है।