भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग देशभर में कहां-कहां पर हैं

भगवान शिव ने अपने भक्तो को धरती पर खुद दर्शन दिए है उन ज्योतिर्लिंग को ही शिव ज्योतिर्लिंग कहा जाता है मान्यता के अनुसार भगवान ने आपने भक्तो का उद्धार करने के लिए इस धरती पर शिव लिंग रूप में विराजमान है

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग कहा कहा है

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुरास प्रजापति दक्ष ने अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रमा के साथ किया चंद्रमा को पति रूप में पाकर उनकी सारी पुत्रियां अत्यंत प्रसन्न थी चंद्रमा की  पत्नियों ने एक पत्नी का नाम रोहिणी था जिससे चंद्रमा बहुत प्रेम करते थे जिसको देखकर उनको और सारी पत्नियां दुखी रहने लगी।वो अपने पिता प्रजापति दक्ष से इसबारे मे कहा तो राजा दक्ष ने चंद्रमा को समझाया कि ऐसा ना करे लेकिन चंद्रमा नहीं माने दूसरी बार राजा दक्ष ने चंद्रमा को श्राप देदिया की जाओतुमको क्षय रोग हो जाएगा ऐसा सुनकर चंद्रमा बहुत दुखी हो गए और अपनी गलती पर पश्चाताप करने लगे ब्रह्मा जी के निर्देश अनुसार  चंद्रमा ने एक शिव लिंग बनाकर महा मृत्युंजय मंत्र का जाप किया जिससे प्रसन्न होकर भगवानने उनको दर्शन दिया और उनसे वर मांगे को कहा तो चंद्रमा ने क्षय रोग से मुक्ति पाने का वर मांगा और भगवान शिव की स्तुति की जिससे भगवान शिव उस शिव लिंग मे साकार रूप में विराजमान होगए और सोमेश्वर कहलाए तभी से इनको सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता । यह ज्योतिर्लिंग इस समय गुजरात में है

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने पुत्रो के विवाह करने के लिए सोचा लेकिन वो सोच में थे कि सबसे पहले किस विवाह किया जाय उन्होंने कार्तिक और गणेश कोबुलाया और उन दोनों से कहा कि सबसे पहले पूरी धरती का चक्कर लगा लेगा उसका विवाह सबसे पहले करेंगे ।ऐसा सुनकर कार्तिक मोर पर सवार होकर धरती का चक्कर लगाने केलिए चलेजाते है उधर गणेश अपने माता पिता का ही चक्कर लगाने लगते हैं।ऐसा देखकर शिव जी पूछते है कि तुम ऐसाक्यों किये तो गणेश जी कहते है कि आप दोनों हितो मेरी दुनिया हो ऐसा सुनकर शिव जी गणेश की शादी  रिद्धी और सिद्धि से कर देते है जब कार्तिक जी वापस आते है ये जानकर उनको बहुत ज्यादा दुख होता हैं।और क्रोच पर्वत पर चले जाते हैं उनको मनाने के लिए उनको शिव और माता पार्वती वहा गएलेकिन वो वहा से कहीं और चले गए और भगवान शिव और  माता पार्वती वहीं पर ज्योतिर्लिंग मे विराजमान हो गए तभी से मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहा जाने लगा।इस समय ये ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में स्थित हैं।।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण अनुसार उज्जैन के राजाचंद्रसेन थे जो महादेव के परमभक्त थे उनका एक मित्र था जिसका नाम मणिभद्र था । जो उनसे प्रसन्न होकर एक दिन एक  चिंतामणि उनको भेट दिया उसको पाकर राजा का राज्य और भी शक्तिशाली हो गए उसे  देखकर सारे राजा उस मणि को उनसे   मांगने लगे लेकिन राजा ने मणि किसी को नहीं दिया कुछ राजा उस मणि को पाने के लिए उनके राज्य पर आक्रमण कर दिए । उस परिस्थिति को देखकर राजा चंद्रसेनभगवान शिव की आराधना करने लगे तभी वहीं पर एक 5 साल का बालक अपनी विधवा मा के साथ आया उनको ऐसा करता देख उसके मन में भी  शिव  की भक्ति का विचार आया घर जाकर वह  एक पत्थर को रख कर उसकी आराधना में लीन हो गया उसकी मां ने उसे बुलाया लेकिन वह नहीं आया उसकी मा ने जाकर देखा तो उनको गुस्सा आया वो सारे सामान को फेक दी उसको मारने लगी बालक ब हुत दुखी होगया कुछ समय बाद उस बालक  के सामने एक दिव्यशिव लिंग देखा उसको देखकर वह बहुत प्रसन्न होगया तभी से भगवान महाकाल उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूपमे विराजमान है।

ओम कालेश्वर ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार एक समय की बात है नारद मुनि कुकर्न नामक शिव के समान बड़ी भक्ति के साथ उनके पास जाकर उनकी सेवा करने कुछ समय बाद वो गिरिराज बिंध्य पर आए और बिंद्य ने बड़े ही भक्ति भाव से उनका आदर किया और देव ऋषि से बोला मेरे पास सब कुछ है कोई कमी नहीं है।तब देव ऋषि नारद खड़े हो गए। और बोले की मेरु पर्वत तुमसे बहुत ऊंचा है।ऐसा सुनकर बिंधय ने भगवन शिव की स्तुति करना  प्रारंभ कर दियाभगवान शिव उनसे प्रसन्न होकर उनको दर्शन दिए उस समय सारे देवता भी वहा पहुंच गए और भगवान शिव को लिंग रूप में विराजमान होने को कहे उस लिंग के दो टुकड़े होगया एक लीन ओम्कारेश्वर अमलेस्वर नाम से जाना जाने लगा यह ज्योतिर्लिंग मध्य् प्रदेश में है ।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के दो स्वरूप हुए नर और नारायण दो ही भगवान शिव की पार्थी शिव लिंग मानकर पूजा करने लगे उससे भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उनसे वर मांगने को कहा उन्होंने उनको पार्थी शिव लिंग में विराजमान होने का वर मांगा उस शिव लिंग में विराजमान होकर केदारनाथ ज्योतिर्लिंग कहलाया।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार पुराने समय मे एक भीम नाम का राक्षस था जो कुभकरन का पुत्र था वह अपनी माता से पूछता कि कोई मेरे पिता है तुम अकेली क्यों हो तो उसकी माता ने कहा कि तुम्हारे  पिता को राम ने मार डाला ऐसा सुनकर उसको बहुत गुस्सा आया वह विष्णु से लड़ाई के लिए भगवान ब्रह्मा जी की तपस्या करने लगा प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने सबसे अधिक बल होने का वरदान दिया बलशाली होकर भीम सभी राजाओं से देवताओं से लड़ाई करने लगा सबको हरा दिया धरती के राजा कामरूप देशके राजा सदिक्ष्ण पर आक्रमण किया उनको हरा दिया और उनको बंदी बना लिया जेल मे ही राजा शिव का लिंग बनाकर पूजा करने लगे एक दिन भीम गुस्सा होकर राजा को मारने चला उस समय भगवान शिव प्रकट होगया और राजा को बचा लिया उसके बाद ये भीम शंकर कहलाए ।

विशेश्वर ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने अपने दो अंस को धरती पर अवतरित किया शिव और शक्ति दोनों ने कई वर्षों तक सृष्टि के रचना के लि ए तप किया जब शिव तप कर रहे थे तो उनके शरीर से स्वेत बुदे निकलने लगी जिसे देखकर विष्णुजी ने अपना सर हिलाया तोउनके कान की एक मणि गिर गई जो मणिकर्णिका कहलाई और उस स्वेत बूंद से सारा संसार डूब गया उस महल को शिव ने  अपने त्रिशूल पर उठा लिया जिसकी रचना शिव ने खुद की थी । शिव शक्ति की तपस्या के  लिए ।जब ब्रह्मा नई सृष्टि की रचना करते है तो यही नगरी काशी कही जाने लगी  शिव खुद यहां अपने आप शिव लिंग में विराजमान हो गए और काशी  विश्वनाथ कहलाए ये वाराणसी में गंगा के तट पर स्थित है।

त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार प्राचीन कल मे एक गोतम नाम के ऋषि थे उनकी पत्नी का नाम अहिल्या था उनके आश्रम में एक बार अकाल पड़ा पानी के लिए लोग दूर जाने लगे इसको देखकर ऋषि ने तपस्या करके जल की व्यवस्था की सारे लोग पुनः वापस आ गए महिलाओं के साथ एक बार उनकी पत्नी का विवाद हो गया सब लोग मिलकर गणेश जी की पूजा उनको आश्रम से निकलने के लिए कहा ।गणेश जी ने उनको निकालने के लिए एक गाय को आश्रम में चरने भेजा गोतम ऋषि जैसे ही गाय को हटाने केलिए हलके हाथो से मार वह गिर कर मर गईगाय हत्या पापकोदुर करने के लिए ऋषि ने पार्थी शिव लिंग बनाकर पूजा की शिव को प्रसन्न किया शिव जी गंगा जी को धरती पर लाकर गोतम ऋषि को शुद्ध किया  वहीं पर शिव लिंग में विराजमान हो गए तभी से ये  त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग  हैऔर गंगा गोदावरी बनकर बह रही है

वैद्यनाथज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार एक बार रावन शिव की स्तुति करके उनको प्रसन्न करके उनको अपने साथ लंका ले जा रहा था।रास्ते में चलते चलते उसको पेशाब लगा वहा पर एक ग्वाला था जो गाय चरा रहा था रावन ने उस शिव लिंग को उसे पकड़ाकर पेशाब करने चला गया जब जादा समय होगया तो वह ग्वाला उस शिव लिंग को वहीं रख कर चला गया जब रावन ने शिव लिंग को धरती पर  देखा तो वहां उठने की कोशिश किया पर  लेकिन वह शिव लिंग उठा नहि  आगे  चलकर वह बैद्यनाथ धाम से प्रसिद्ध हुआ।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार एक बार एक जंगल में तारुका और दारुक नाम के राक्षस और राक्षसी रहते थे तरुका को वरदान था कि वह जंगल को कही भी उड़ा के ले जा सकती है वह लोगो को परेशान करने लगी सारे लोग मिलकर महर्षि आर्व के पास गए उन्होंने उसको श्राप दिया कि वह धरतीपर कुछ भी नष्ट किया तो भश्म हो जाएगी वह जंगल को लेकर समुन्दर मे चली गई वहीं पर लोगो को बंदी बनने लगी जिनको बंदी बनाया था उसमे से एक शिव भक्त था  जब उसका पति उसको मारने के लिए आया तो भगवान शिव प्रकट होकर उनको भाष्म कर दिया इसको देखकर राक्षसी माता पार्वती की तपस्या की और भगवान शिव को रोकने के लिये कहा और अपने पुत्रो को उस वन में रहने की इजाजत मांगीतब से भगवान शिव नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं।।।यह शिव लिंग गुजरात में हैं।

श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग 

शिव पुराण के अनुसार इस शिव लिंग की स्थापना स्वयं श्री राम ने थी जब वो लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे तो उन्होंने सबसे पहले बालू से शिव लिंग बनाकर उसकी पूजा की थी और अपनी विजय के लिए प्रार्थना की थी तभी से  ये श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में है

श्री घृषणकेस्वर ज्योतिर्लिंग

शिव जी का 12 वा ज्योतिर्लिंग घृषणकेश्वर महादेव है एक समय देव गिरी पर्वत के निकट सुधर्मा नामक एक ब्राह्मण रहते थे उसकी पत्नी का नाम सुधर्या था उसको किसी चीज की कमी नहीं थी बस एक कमी संतान की थी पति पत्नी दोनों मदे के भक्त थे पुत्र के लिए सूधर्या ने अपने पति की शादी अपने बहन से कर दी उसकी बहन का स्वभाव बहुत ही अच्छा था उसका पति सुधार्या से कम उसकी बहन से जड़ा प्यार करने लगा जिससे सुधर्या को अपनी बहन से जलन होने लगी कुछ समय बाद उसकी बहन को पुत्र की प्राप्ति हुई तोनो खुश रहने लगे कुछ समय बीतने पर उसके पुत्र का विवाह हुआ सधर्या को और जलन होने लगी इश्या बस उसने अपने है पुत्र को रात मार डाला लेकिन उसकी बहन शिव की इतनी बड़ी भक्त थी कि उस समय भी शिव भक्ति करना नहीं भूली उसने शव को लिटा कर पहले भगवान की भक्ति करने लगी उससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसको दर्शन दिए और उससे उसकी बहन की गलती के लिए दण्ड   देने   को कहा उसने अपनी बहन को माफकर दिया उसका पुत्र भी जीवित होगया और वहीं पर भगवान शिव घृषणकेश्वत ज्योतिर्लिंग मे विराजमान हो गए।