भारत के कुछ विशाल मन्दिर | Beautiful Temples In India

भारत एक ऐसा देश है जहां पर लोग पूजा ,पाठ, भक्ति ,पर जादा आस्था रखते है भारत में सबसे ज्यादा लोग भगवान पर विश्वास रखते है भारत देश आपनी संस्कृति, परम्परा और श्रद्धा की वजह से जाना जाता है भारत देश के लोग भगवान की भक्ति के लिए कितनी दूर दूर तक कि यात्रा भी करते है इस विश्वास के साथ की भगवान सब है भारत देश को हिन्दुस्तान भी कहा जाता है इस देश के लोग हिंदुत्व पर जादा विश्वास रखते है । आज हम जानेंगे भारत के सबसे विशाल और पैसे वाले मंदिरो के बारे में

भारत का सबसे विशाल मंदिर

  • एकमबरनाथ शिव मंदिर यह भारत देश विशाल मंदिरो मे से एक है यह मंदिर तमिलनाडु के कंजीपुराम मे है यह मंदिर लगभग 92862 किलो मीटर मे फैला हुआ है इस मंदिर का दरवाजा सबसे बड़ा दरवाजा है । यह मंदिर बहुत पुराना मंदिर है इस मंदिर का निर्माण पल्लवो ने करवाया था ।इस मंदिर मे बहुत पुराना एक आम का पेड़ है जिसकी पूजा की जाती है ।
  • दक्षिणी ईश्वर काली माता मंदिर यह मंदिर पश्चिम बंगाल का सबसे पुराना और बड़ा मंदिर है यहां मा काली की पूजा होती है जिसे पटरानी कहते है यह मंदिर कलकत्ता मे स्थित हैं इस मंदिर का निर्माण 1557 मे रानीरास्माई ने करवाया था । यह मंदिर हुगली नदी के तट पर स्थित है इस मंदिर की प्रतिमा मे काली माता भगवान शिव के लेटे हुए शरीर पर खड़ी है। यह मंदिर भारत  देश के विशाल मंदिरो में से एक है ।
  • अन्नामलाई शिव जी का मंदिर यह मंदिर तमिलनाडु मे स्थित है ये मंदिर भारत का सबसे बड़ा मंदिर है इस मंदिर का विस्तार संगम राज वंस के राजाओं ने करवाया था।
  • बरिद्देश्वर मंदिर इस मंदिर का निर्माण राजरांचोल ने करवाया था ।यह भारत का एक ऐसा मंदिर है जिसकी नीचे जमीन पर इसकी परछाई नहीं पड़ती है इस मंदिर को भारत का सबसे विशाल मंदिरो में से एक माना जाता है। इस मंदिर को विश्व धरोहर के रूप में जाना जाता है ।
  • अक्षरधाम मंदिर दिल्ली यह मंदिर नई दिल्ली में स्थित है ।यह मंदिर स्वामी नारायण का मंदिर है इस मंदिर को 2005 मे बना कर तैयार किया गया था लगभग 5 साल मे यह मंदिर बनकर तैयार हो गया था यह भारत का सबसे विशाल मंदिर है इस मंदिर के दीवारों पर देवताओं की छोटी छोटी मूर्तियां बनी हुई है इस मंदिर बहुत ही सुन्दर और भव्य है जिसके लिए 2007 मे इसे गिनीस बुकआफ रिकोड मे स्थान दिया गया ।इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियतहै कि मंदिर में एक मनुष्य है जो आधा बना है आपने आधे शरीर को खुद ही बना रहा है ।यह हिंदुओ का सबसे बड़ा मंदिर है इस मंदिर के अंदर स्वामी नारायण की बहुत ही सुन्दर और सोने के संग से बनी हुई भव्य मूर्ति है। इस  मंदिर का निर्माण स्वामी नारायण जी के संस्था के द्वारा करवाया गया था
  • छत्तरपुर मंदिर यह मंदिर दिल्ली स्थित है।इस का निर्माण 1974 मे कर्नाटक के स्वामी बाबा नागपाल के द्वारा करवाया गया था इस मंदिर मे माता रानी की पूजा की जाती है इस मंदिर में नवरात्री के दिनों  में काफी भीड लगती है इन दिनों माता रानी के लिए कर्नाटक से रंग बिरंगे फूल मगाए जाते है।
  • अयोध्या का राम मंदिर यह मंदिर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में है जिस मंदिर का निर्माण पूरी तरह से हुआ नहीं है अभी लेकिन इस मंदिर को बनने के लिए जिस तरह का डिजाइन रखा गया है उससे लगता है जिस दिन यह मंदिर बन कर तैयार होगा भारत का सबसे बड़े मंदिरो में से एक होगा यह मंदिर श्री राम जन्म भूमि पर बन रहा है जो भगवान श्री राम का सबसे बड़ा मंदिर है।इस मंदिर का निर्माण भारत के लोगो के द्वारा दिए गए चंदे से है इस मंदिर की सबसे अच्छी बात यह होगी कि इस मंदिर मे एक साथ 10 हजार लोग एक साथ दर्शन कर पाएंगे इस मंदिर में 24 प्रवेश द्वार होंगे और121खंभे होंगे 161 फिट ऊंचा होगा यह मंदिर इस लिए यह मंदिर बहुत ही सुन्दर और भव्य होगा ।
  • रंगनाथस्वामी जी का मंदिर यह भारत का सबसे बड़ा मंदिर है यह मंदिर भगवान विष्णु का स्वरूप भगवान  रंगनाथ स्वामी जी  का  है यहमंदिर कावेरी नदी के तट पर स्थित है माना जाता हैं कि यही पर भगवान विष्णु ने रंगनाथ स्वामी के रूप में अवतार लिया था ।

पौराणिक कथा के अनुसार गौतम ऋषि मे तप करके कावेरी नदी को देवलोक से धरती पर लाए थे जिससे सारे ऋषियों को उनसे ईश्या हो गई उन्होंने गौतम ऋषि पर गो हत्या का पाप लगाकर उनको आश्रम से बाहर निकाल दिया गया था जिससे गौतम ऋषि बहुत दुखी रहने लगे  थे एक बार गौतम ऋषि दुखी होकर कावेरी नदी पर आकर भगवान विष्णु की तपस्या करने लगे उनसे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उनको रंगनाथ स्वामी के रूप में दर्शन दिया ।

इतिहास के अनुसार श्री रामानुजाचार्य अपनी  बुढ़ापे की अवस्था में यहां आए थे और लगभग कई वर्षों तक यह रहे लेकिन जब अवस्था बढ़ने लगी तो श्री रामानुजाचार्य ने भगवान से अनुमति लीआपनी  शरीर को त्यागने के लिए और अपने शिष्यों से कहा कि में अब इस शरीर का त्याग करूंगा आज भी उनकी मृत शरीर को ममी के रूप में केसर और चंदन का लेप लगाकर रखा गया है और यह मम्मी लगभग1000 पुराना है और यह रामानुजाचार्य के मूर्ति के पीछे  नीचे रखा गया है और यहां पर इनकी ही पूजा होती हैं।