भाद्र मास का चौंथ जानें इस माह का महत्व और व्रत

यह व्रत हिंदूकैलेंडर के अनुसार भादवमास के कृष्ण पक्ष में चतुर्थी  के दिन पड़ता है यह व्रत सोहागीनमहिलाएरखती है अपने पति की लंबी उम्र के लिए । पूरे दिन निरा जल निराहार रहकर व्रत रखती है और रात में जब चंद्रमा निकल जाता है तो उनका दर्शन करके उनको अर्गदेती है ।और विधि विधान से उनकी पूजा करके फलाहार ग्रहण करती  है ।अगलेदिन अनन्य को छू के पंडित को दान करती है उसके बाद ही भोजन करती   है ।

2022  में  भाद्र मास का चौथ कब है

इस वर्ष ये पर्व 29सितम्बर को मनाया जाएगा  ये व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है इस व्रत से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है ।इस व्रत को संकट चौथ भी कहते है

भाद्र मास की चौथ के दिन कोन से भगवान की पूजा की जाती है

इस दिन पूजा अर्चना करने से सारे परेशानियों से छुटकारा मिलता है और आपके जीवन में कोई परेशानियां नहीं आती है ।

भाद्र मास की चौथ की  कहानियां

राजा नल की कहानी

प्राचीन काल मेनल नाम का राजा था उसकी रानी का नाम दमयंती था वो बहुत ही सुन्दर व सुशील  थी ।  एक बार राजा नल के राज्य पर लुटेरों ने अपना कब्जा कर लिया उन्होंने उनके सारे धन पर अपना अधिकार कर लिया महल को जला दिया और राजा को वहा से निकाल दिया

अपना राज्य छोड़कर राजा इधर उधर भटकने लगे अपनी पत्नी को साथ लेकेभटकते भटकते राजा नल और रानी दमयंती वन में जा पहुंचे और एक दूसरे से अलग हो गए राजा भटक गए रानी कही और भटक गई दोनों एक दुसरेको खोजते और विलाप करते ।

खोजते खोजते रानी की मुलाकात  महर्षि शरभंग से हुई रानी ने उनको नमस्कार किया और अपने दुख को उनके सामने रखा रानी की बात को सुनकर महर्षि मे उनको भाद्र मास की चौथ के बारे में बताया

उन्होंने उनको भाद्र मास की चौथ का व्रत करने के लिए कहा महर्षि ने बताया कि यह व्रत भगवान विघ्नहर्ता का है वो हर संकट से तुम्हारी रक्षा करेंगे और तुमसे तुम्हारे पति की मुलाकात जल्द ही करवाएंगे

दमयंती ने महर्षि की बात मानी और भाद्र मास की चौथ के दिन से इस व्रत को करना प्रारंभ किया व्रत को करने के साथ महीने बाद ही रानी दमयंती का अपने पति नल से मिलन हो गया और उनका खोया हुआ राज्य भी उनको पुनः वापस मिल गया

इस लिए ये मान्यता है कि भाद्र मास की चौथ के दिन जो औरतेव्रत रखती है विधि विधान से पूजन करती है गणेश जी का आवाहन करती है भगवान गणेश अनी सारी आकांछाओ को पूरा करते है उनको हमेशा सोहागिन रखते है।

भाद्र मास की चौथ का पूजन विधि

भाद्र मास की चौथ की पूजा विधि पूरे विधि विधान से किया जाता है

  • जिस दिन व्रत रखना रहता है उसके एक दिन पहले रात में  उठ के महिलाएसबसे पहले कुछ मीठा खा कर पानी पीती है
  • अगले दिन सुबह उठ के अपनी नित्य क्रिया कर्म से निवृत्त होकर स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनती है
  • और भगवान गणेश की पूजा आराधना करती है।
  • पूरे दिन निर्जल और निराहार व्रत रखती है भगवान गणेश से अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है।
  • पूरे दिन अपने मन में भगवान गणेश को स्मरण करती है
  • साम के समय सोलह श्रृंगार करके चंद्रमा के उगने का इंतजार करती है
  • जब चंद्रमा उदित हो जाते है तो उनको जल से अर्ग देती है
  • और धूप, दीप, अगरबती जलाकर पूजा अर्चना करती है
  • उसके बाद अपने पति, और बड़ों का आशीर्वाद लेती है
  • उसके बाद ही जल पी कर अपने व्रत को तोड़ती है

और रात में फलाहार करके व्रत को पूरा करती है ।