Chaitra Navratri 2022 की तारीख | नौ देवी के नाम व पूजा।

चैत्र नवरात्रि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अप्रैल महीने में पड़ता है । Chaitra Navratri के नौ दिन मा के नौ स्वरूप की पूजा की जाती हैं।जिसमे मा  शैलपुत्री , चंद्र्घंट ,कूष्माण्डा,महागौरी , कालरात्रि ,,कात्यायनी , ब्रह्मचारिणी , स्कंदमाता , सिद्धिदात्री मा के  नौ स्वरूप की पूजा करतेहै।

आइए जानते है नौ दिन में किस किस दिन कोन कोन सीदेवी की पूजा की जाती है

1. मा शैलपुत्री

Chaitra Navratri के पहले दिन मा शैलपुत्री की पूजा की जाती है ये मा हमारे दांपत्य जीवन को सुखमय करती है मा शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री है इसलिए उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है मा शैलपुत्री की पूजा करने से शरीर के मूलाधार चक्र जागृत होते है और हर तरह से सुख प्राप्त करते है।

शैलपुत्री माता रानी का भोग शैलपुत्री माता रानी को गाय का घी,या दुधसे बने पदार्थ को भोग में रखा जाता है

2. मा ब्रह्मचारिणी

  • नवरात्री के दूसरे दिन मा ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है जो लोग इनकी पूजा अर्चना करते है उन्हे तप, त्याग , वैराग्य , संयम और अच्छे आचरण की प्राप्ति होती है ।और वे लोग जिस भी बात का निश्चय कर लेते है उसको जरूर पूरा करते है ।

ब्रह्मचारिणी मातारानी का भोग ब्रह्मचारिणी माता रानी को भोग के रूप में चीनी  या शक्कर बहुत ही पसंद है

3. मा चंद्र्घंटा

  • नवरात्री के तीसरे दिन मा चंद्र्घंटा की पूजा की जाती है इनके माथे के ऊपर ललाट पर घंटे के आकार का चन्द्र बना हुआ है इस लिए इन्हें  चंद्र घंटा कहा जाता है।जो भी इनकी आराधना करता है उनको सारे कष्टों  से मुक्ति मिल जाती है।

चंद्र्घंटा मातारानी का भोग माता रानी को भोग के रूप में दूध चढ़ाया जाता है

4. मा कूष्माण्डा

  • नवरात्री के चौथे दिन मा कूष्माण्डा की पूजा की जाती है ।इन्होंने अपने उदर से ब्रह्मांडको उत्पन किया था इस लिए इन्हें कूष्माण्डा कहा जाता है।जो इनकी पूजा करता है उसको सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और अपने जिंदगी में हर खुशी मिलती है में सम्मान मिलता है।

कूष्माण्डा मातारानी का भोग कूष्माण्डा माता रानी को भोग के रूप में मालपुआ चढ़ाया जाता है

5. स्कन्द माता

  • नवरात्री के पांचवे दिन स्कन्द माता की पूजा की जाती है मा आदिशक्ति मा दुर्गा की रूप स्कन्द माता है इनके पुत्र का नाम कार्तिकेय था जिसकी वजह से  इनको स्कन्द माता कहा जाता है।इनकी पूजा करने वाली लोगो को हर सुख की प्राप्ति होती है और जीवन के अंत में इनको मोक्ष की प्राप्ति होती है। इनको पद्मासना देवी कहा जाता है।

स्कन्द  माता रानी का भोग माता रानी को केले का भोग चढ़ाया जाता है।

6. मा  कात्यानी

  • नवरात्री के छठे दिन कात्यानी देवी की पूजा की जाती है।महर्षि कात्यायन ने तपस्या करके मा आदिशक्ति को प्रसन्न किया उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मा ने उनके घर पर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया जिससे उनका नाम कात्यानी पड़ा । छठे दिन मा  के इसी रूप की पूजा की जाती है इनकी जो लोग पूजा करते है उनको धर्म ,अर्थ,काम,मोक्ष की प्राप्ति  होती है।और हर तरह से सूख को प्राप्त करता है।

कात्यानी माता रानी का भोग मातारानी को भोग के रूप में शहद बहुत ही पसंद है ।

7. मा कालरात्रि

  • नवरात्री के सातवे दिन मा कालरात्रि की पूजा की जाती है ये आदिशक्ति मा दुर्गा का रूप है जिसने राक्षसों कासंहार किया था ।और श्रृष्टि को बचाया था । राक्षसों का संहार करने की वजह से इनको मा काली भी कहा जाता है ।मा को बस याद मात्र करने से ही हर तरह का डर,भूत  ,पिचास हर तकलीफ दूर हो जाता है।मै की जब कृपा होती है तो भानुचकर जागृत  होता है।

कालरात्रि माता रानी का भोग माता रमी को भोग के रूप में गुड बहुत ही पसंद है।

8. मा महागौरी

नवरात्री के आठवें दिन मा महागौरी की पूजा की जाती है ये आदिशक्ति का ही स्वरूप है।जब राक्षसों का संहार करने के लिए मा ने कालरात्रि का रूप लिया था उसके बाद मा से तपस्या करके गौरी रूप का वर्ण किया उसके बाद ये मा महागौरी का कहलाया। और  मा महागौरी के रूपमे सबका भला करती है।

माता महागौरी का भोग मातारानी को भोग के रूप में हलवा बहुत ही पसंद है।

9. मा सिद्धिदात्री

  • नवरात्री के नवीदिन मा सिद्धिदात्री की पूजा की जाती  है ।जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि मा का ये रूप सभी लोगो को हर प्रकार से ऋदधी और सिद्धि प्रदान करने वाली है ।जिसपर मा मातारानी की कृपा हो जाती है उसके लिए कोई भी काम असंभव नहीं रहता है।