कानपुर का इतिहास | History Of Kanpur

कानपुर उत्तर प्रदेश का एक शहर है जो अपने उघोग के लिए जाना जाता है यह अपने इस कार्य के लिए पूरे देश में विख्यात है यहां के चमड़े के जूते पूरे देश में बिकते है । यह भारत का पहला ऐसा शहर है जो देश को सबसे जादा टैक्स देता है ।कानपुर में 76% हिन्दू ,20% मुसलमान, और 1.7% जैन ,तथा 2.3% अन्य धर्म के लोग रहते है ।

इतिहास में बताया गया है कि इस कानपुर शहर की स्थापना सचें द्री राज्य के राजा हिन्दू सिंह ने कि थी ।कानपुर का पुराना नाम कान्हा पुर था लेकिन बाद में बदल कर कानपुर हो गया ।जब अंग्रेजो का शासन यहां था तब यहा प्रेड हुआ करता था ।इस लिए इस समय इस प्रेड ग्राउंड के नाम से जाना जाता है ।कानपुर के एक इलाके में जहा पर लोग जब नदी पार करते थे तो परमिट लेते थे इस समय उस इलाके को परमट कहा जाता है ।कानपुर शहर में कई पर्यटक स्थल भी है जिसको देखने के लिए लोग देश के कोन कोन से आते है।यहां एक घंटा घर है मान्यता है कि पहले इसकी आवाज 15 किलो मीटर दूर तक जाती थी लोग इसी घड़ी से समय का मिलान करते थे ।कानपुर में सबसे पहले ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने नील का काम शुरू किया था। 1803 मे अंग्रेजो के द्वारा कानपुर को जिला बनाया गया था।

कानपुर का उद्योग

आप सभी जानते है कि कानपुर सबसे ज्यादा चमड़े का व्यापार करता है चमड़े की ही वस्तुएं बनाकर यहां से देश के कोन कोन मे जाती है जैसे जूतेचप्पल, बैग ,हेंड पर्स,इत्यादि।

कानपुर के पर्यटक स्थल

कानपुर मे अनेक पर्यटक स्थल है जिसे देखने के लिए देश के कोन कोन से लोग आते है जैसे

  • भीतर गांवमंदिर इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी में गुप्त काल में हुआ था । यह एक ऐतिहासिक मंदिर है यह मंदिर बहुत ही पुराना माना जाता है । इसकी दीवारों पर को वस्तु कला शैली देखने को मिलती है वो लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करती है ।
  • नाना राव पार्क  यह पार्क नाना साहब पेशवा की याद में बनवाया गया है नाना राव पेशवा 1857 के दौरान आपना वीर योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे ।यहां पर कई स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां है जिसको देखने को मिलता है ।
  • ब्लू वर्ल्ड वाटर पार्क यह एक वाटर पार्क है यहां पर सभी उम्र के लोग समय बिताने के लिए आते है और अपना मन बहलाते है इस पार्क में बच्चो के लिए अनेक प्रकार के झूले है जिनमे बच्चे  बैठ कर खूब मस्ती करते है।यहां खाने पीने की भी व्यवस्था है।आप खरीद के खा सकते है
  • मोती झील इस झील को अंग्रेजो ने निर्मित कराया  था लेकिन इस समय यह झील पर्यटक स्थलों में से एक है इस झील के किनारे बहुत ही सुन्दर आकर्षक पोधे लगाए गए है इस झील का नजारा रात के समय बेहद खास होता है क्योंकी रात के समय पूरी झील रंगबिरंगे प्रकाश से जगमगा उठता है ।
  • ग्रीन पार्क स्टेडियम यह स्टेडियम भारत का लोग प्रिय स्टेडियमों में से एक है यहां क्रिकेट  मैच खेला जाता है यहां पर एक साथ 32 हजार लोगो के साथ बैठने को व्यवस्था हैयह स्टेडियम 1945 मे बना था ।
  • कानपुर मेमोरियल चर्च इस चर्च को 1857 के युद्ध में मरे अंग्रेजो को स्मरण रखने के लिए 1875 मे इस चर्च का निर्माण किया गया था ।इस चर्च की डिजाइन ग्रेनवेले ने दिया था ।
  • जैन ग्लास मंदिर यह एक जैन मंदिर है इस मंदिर में भगवान महावीर  की प्रतिमा स्थापित है इस मंदिर में कांच कि सुन्दर सजावट की गई है ।
  • Z स्कोर मॉल इस मॉल मे कई शोरूम है यह कानपुर का सबसे अच्छा मॉल है यहां पर दूर दूर से लोग खरीददारी करने आते है सोपिग के लिए ये एक बेहतरीन जगह है ।
  • कानपुर चिड़ियघर यह प्रमुख स्थलों में से एक है ।क्षेत्र फल की दृष्टि से यह भारत का तीसरा बड़ा चिड़िया घर है ।यहां पर हर प्रकार के जानवर देखने को मिलते है ।
  • बिठूर  यहां पर आप बाल्मीकि  आश्रम ,द्रोपतिला, शिधी धाम आश्रम ,बिठूर संग्रहालय इत्यादि देख सकते है ।
  • फूल बाग  यह स्मारक को गणेश उद्यान के नाम से जाना जाता हैं यह बाग कानपुर के बीचों बीच में है ।
  • जापानी गार्डन यहां पर बहुत सी कला आकृतियों का अवलोकन करने को मिलेगा ।इस गार्डन में जापानी शैली देखने को मिलती है इसको बल उद्यान भी कहते है ।

कानपुर युनिवर्सिटी इस युनिवर्सिटी का पूरा नाम छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर है यह विश्व विद्यालय कानपुर शहर को पूरे भारत मे एक विशिष्ट स्थान देता है सन् 1966 मे आगरा से अलग करके इस विश्व विद्यालय की स्थापना की गई थी।इस विश्व विद्यालय में हर प्रकार के शिक्षण कि व्यवस्था है अलग  अलग  जानकारी के लिए के लिए अलग अलग व्यवस्थाएं है यह पर कैम्पस की भी व्यवस्था है यहां शुरू से ही विद्यार्थियों को अच्छी जानकारी दी जाती है इस विश्व विद्यालय में  पुस्तकालय कि व्यवस्था उपलब्ध है जहा जाकर छात्र अध्ययन करते है। यहां प्रयोग शाला में अनेक प्रकार के आधुनिक उपकरण है जिसपर छात्र रिसर्च करते है। युनिवर्सिटी कैम्पस में 2004 से प्रारंभ युनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ फार्मेसी ने अपनी पहचान राष्टीय अस्तर पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय अस्तर पर बना चुका है ।इस युनिवर्सिटी मे खेल विभाग  तथा शारीरिक ज्ञान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है यहां का   पुस्तकालय बहुत ही विशाल है इसकी स्थापना 1968 ईसवी में हुई थीं। यहां एक विषय की1 लाख से ज्यादा पुस्तके मौजूद है