लखनऊ का इतिहास | नवाबों के शहर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राजधानी है लखनऊ को नबाबो का शहर कहा जाता है लखनऊ अधिकतर आपने स्वाद के लिए जाना जाता है ऐसी मान्यता है कि लखनऊ के लोगो मे एक अलग सी बात होती है उनके बोलने का तरीका कुछ अलग होता है वो आपनी भाषा में हिंदी ,उर्दू और ,अंग्रेजी का प्रयोग करते है लखनऊ को प्राचीन काल में लक्ष्मण पुरीकहा जाता था ।लखनऊ अपने एक अलग अंदाज की वज़ह से पूरे देश मे जाना जाता है यहां पर कई पर्यटक स्थल भी है जिसको देखने के लिए विश्व के कोनेकोने से लोग आते है

लखनऊ को नबाबो का शहर क्यों कहा जाता है

आप सभी जानते है कि  लखनऊ को नबाबो का शहर कहा जाता है लखनऊ की स्थापना सन् 1775 ईसवी में नबाब आसफ उद्दौला ने कि थी।पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी इलाहाबाद था बाद में इसमें बदलाव करके इसको लखनऊ किया गया था । लखनऊ में  कई पर्यटक स्थल है दुनिया का सबसे पुराना स्कुल लखनउ के पुराने स्कूलों में सेला मटेरियल स्कूल इसी शहर में है ।इसकी स्थापना क्लाउड मार्टिन की याद को ताजा रखने के लिए की गई थी।लखनऊ पूरे विश्व में विकसित होने वाले शहरों में 74 नंबर पर आता है इसका विकास बहुत तेजी के साथ हो रहा है ।यहां पर पहले मुगल शासन था  । यहां के मुगल राजा नवाब कहे जाते थे उनकी सान शौकत ,रहन सहन ,खान पान ,जिंदगी जीने का तरीका सब अलग था इसलिए लखनउ को नवाबो का शहर कहा जाने लगा ।

लखनऊ का नाम कैसे पड़ा

लखनउ को पहले लक्ष्मण पूरी कहा जाता था बाद में इसका नाम बदल कर लखनऊ रखा गया । लखनऊ अवध क्षेत्र में अंदर आता है पौराणिक कथाओं के अनुसार लखनऊ राजा दशरथ के पुत्र श्री राम ने अपने भाई लक्ष्मण को उपहार स्वरूप अवध का एक क्षेत्र दिया था लक्ष्मण ने गोमती नदी के किनारे पर एक शहर को बसाया जिसका नाम लक्ष्णमपुरी पड़ा था इसी नाम को बाद ने बदल कर लखनऊ रखा गया लखनऊ का नाम राम के भाई लक्ष्मण के नाम पर पड़ा है। लखनऊ अपनी संस्कृति को आधुनिकता से जोड़े हुए है।

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी कब बना

लखनऊ जो कि उत्तर प्रदेश की राजधानी है इसको 1921 मे ईसवी में उत्तर प्रदेश की राजधानी बनाया गया

लखनऊ का पर्यटक स्थल

लखनऊ में कई पर्यटक स्थल है ।जिनको देखने के लिए लोग दूर दूर से आते है और इसकी तरफ आकर्षित होते है ।

दिलकुसा कोठी

यह स्थान लखनऊ मे गोमती नदी के तट पर है जहा एक दिल्कुसा गार्डन है और उसके अंदर यह जगह है जहां एक कोठी बनी हुई है जिसका निर्माण सन1800 मे हुआ था ।इस कोठी का इस्तेमाल भारत की पहली लड़ाई के समय स्वतंत्रता सेनानियो के द्वारा किया जाता था ।लेकिन यह अब एक खंडहर बन चुका है।

जनेश्वर मिश्रा पार्क

यह पार्क लखनऊ के गोमती नगर मे है जो समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्रा के नाम पर बना है।इस पार्क में 40 एकड़ जमीन मे फैली हुई एक खूब सूरत झील है ।जिसका आंनद अधिकतर पर्यटक साम  के समय लेते है यहां पर पर्यटकों की जानकारी के लिए एक लड़ाकू विनाम भी रखा गया है ।

साइंस सिटी

यह जगह लखनऊ मे अलीगज इलाके में है यह एक साइंस पार्क है यहां पर पर्यटक साइंस की जानकारी और ब्रह्मांड कि जानकारी हासिल कर सकते है । यही पर एक साइंस म्यूजियम भी है जिसमे पर्यटक विज्ञान से संबंधित हर जानकारी को प्राप्त कर सकते है ।

चंद्रिका देवी मंदिर

यह मंदिर लखनऊ में गोमती नदी के तट पर लखनऊ सीता पुर के रास्ते पर बना हुआ है । यह मंदिर मा दुर्गा का है यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना माना जाता है । यहां पर एक भगवान शिव की विशाल प्रतिमा स्थापित है यहां नवरात्री में जादा भीड़ लगती है ।

अमीना बाद

यह  बाजार लखन ऊ को सबसे सस्ती और अच्छी बाजार है यह बाजार लखनऊ का चादनी चौंक भी कहा जाता है ।यह बाजार लगभग 165 साल पुराना बाजार है और काफी दूरी मे ये बाजार फैला हुआ है । इस बाजार की सबसे बड़ी विशेषता चिकेन की कढ़ाई व कपड़ा ।

ब्रिटिश रेसीडेंसी

यह स्थान लखनऊ का एतिहासिक स्थलों में से एक है यहां पर 18 वी शताब्दी मे बनी हुई कई इमारतें आज भी है । गोमती नदी के तट पर बनी इस स्थान पर पहले अंग्रेजो को घर हुआ करता है यहां पर एक म्यूजियम भी है जिसको पर्यटक देखने के लिए आते है ।

अम्बेडकर मेमोरियल पार्क

इस पार्क को 2008 मे मायावती जी ने बनवाया था यह पार्क डाक्टर भीम राव अम्बेडकर जी के नाम से बना है ।जो इस समय लखनऊ की छवि को प्रदर्शित करता है । यहां पर डॉ भीम राव अंबेडकर की मूर्ति भी बनी हुई है । यहां और कई स्मारक बने हुए है ।

लखनऊका  चिड़िया घर

इस चिड़िया घर को देखने के लिए लोग दूर दूर से आते है यहां पर हर प्रकार के जानवर रखे गए है यहां हर प्रकार की चिड़िया देखने को मिलती है यह चिड़िया घर 72 एकड़ के क्षेत्र में बना हुए है और लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करता है।

हज़रत गंज

हज़रत गंज लखनऊ का केंद्र माना जाता है । यह शहर का सोपिंग कॉम्प्लेक्स परिवर्तन चौक मे स्थित है।हज़रत गंज लखनऊ का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स है यह छोटे बड़े कई मोल है ।

बड़ा इमामबाड़ा

यह लखनऊ एक धार्मिक और  एतिहासिक  स्थल है इसे भूल भुलैया भी कहा जाता है इसका निर्माण 1783  ईसवी में आसफुद्दौला ने करवाया था ।यह लखनऊ की सबसे उत्कृष्ट इमारत मानी जाती है ।इस इमारत में काफी दरवाजे है जो एक जैसे ही दिखाई देते है इस लिए इसमें जाने के बाद पता नहीं चलता कि कोन से दरवाजे से अंदर गए है और कोन दरवाजे से बाहर आए इस लिए इसे भूल भुलैया भी कहा जाने लगा ।

जमा मस्जिद

इसका निर्माण अवध के बादशाह मुहम्मद अली शाह ने इसको बनवाना शुरू किया था इसको बनाने में हर रोज 4000कारीगर और 8000मजदूर काम करते थे लेकिन इसको बनवाने से पहले ही इनका निधन हो गया तो उसी नक्से पर इनकी बेगम मलाइका जहा  ने इसको पूरा करवाया था ।

लखनऊ का  शाही पकवान

लखनऊ के शाही पकवान मे टुंडे के कबाब ,गलोटी कबाब और रूमाली रोटी ,शिरमाल की रोटी, चांदनी चौक के पराठा, शर्मा जी की चाय ,टोकरी चाट ,मलाई की गिलोरी, लखनऊ की चिकन बिरयानी तंदूरी रोटी , लखनऊ का स्पेशल पान इत्यादि ।